पुणे न्यूज डेस्क: अमाडेआ एंटरप्राइजेज एलएलपी के पार्टनर दिग्विजय पाटिल ने मुंढवा सरकारी जमीन सौदे से जुड़े मामले में दायर अपनी अग्रिम जमानत अर्जी शहर की अदालत से वापस ले ली है। यह मामला खड़क पुलिस स्टेशन में दर्ज है और इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है।
पाटिल ने अदालत को बताया कि उनकी जमानत अर्जी लंबित रहने के दौरान पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसके बाद उन्हें अपने पक्ष और आधारों में संशोधन करने की जरूरत महसूस हुई। इसी कारण उन्होंने फिलहाल अर्जी वापस लेने और बाद में नई अर्जी दाखिल करने की अनुमति मांगी। अदालत ने यह मांग स्वीकार करते हुए आवेदन को “वापस लिया गया” मानकर निस्तारित कर दिया।
यह मामला निलंबित पुणे सिटी तहसीलदार सूर्यकांत येवले द्वारा मुंढवा और बोपोड़ी की सरकारी जमीनों पर कथित रूप से अवैध आदेश पारित कर निजी पक्षों को मालिकाना हक देने से जुड़ा है। एक आदेश में येवले ने बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जिसके पास 2038 तक जमीन लीज पर है, को अमाडेआ एंटरप्राइजेज एलएलपी के पक्ष में जमीन खाली करने का पत्र लिखा था। इस एलएलपी में पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय अजित पवार के पुत्र पार्थ पवार भी पार्टनर हैं, हालांकि उनका नाम एफआईआर में शामिल नहीं है।
मामले में दिग्विजय पाटिल के साथ शीतल तेजवानी (272 वतनदारों की पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर), सूर्यकांत येवले और छह अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। आर्थिक अपराध शाखा ने 27 जनवरी को तेजवानी के खिलाफ 1,886 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। पाटिल के वकील एस.एस. कुलकर्णी ने 18 फरवरी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी.वी. वाघ की अदालत में ‘पुरसीस’ दाखिल कर कहा कि चार्जशीट के तथ्यों का अध्ययन करने के बाद ही नई जमानत अर्जी दायर की जाएगी।