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अभय फिरोदिया: फोर्स मोटर्स की सफलता और ऑटो विरासत की कहानी |

Photo Source : Google

Posted On:Wednesday, February 18, 2026

पुणे न्यूज डेस्क: भारतीय ऑटोमोबाइल जगत के दिग्गज और फोर्स मोटर्स के अध्यक्ष अभय फिरोदिया का जीवन नवाचार और विरासत का अद्भुत संगम है। पुणे के एक जैन परिवार में जन्मे फिरोदिया ने अपनी शिक्षा ग्वालियर और पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से पूरी की, जहाँ उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक किया। साल 1958 में उनके पिता स्व. नवलमल फिरोदिया द्वारा स्थापित इस कंपनी की कमान उन्होंने 1995 में संभाली। उनके नेतृत्व में कंपनी ने 'बजाज टेंपो' से 'फोर्स मोटर्स' तक का सफर तय किया और भारतीय सड़कों पर बैलगाड़ी के विकल्प के रूप में शुरू हुआ यह सफर आज वैश्विक ब्रांड्स के साथ जुड़ चुका है।

अभय फिरोदिया ने केवल पारिवारिक व्यवसाय को आगे ही नहीं बढ़ाया, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित किया। फोर्स मोटर्स आज मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और रोल्स रॉयस जैसी प्रतिष्ठित लग्जरी कारों के लिए उच्च क्षमता वाले इंजनों का निर्माण करती है। साल 2009 में उन्होंने प्रबंधन की कमान अपने बेटे प्रसन्न फिरोदिया को सौंप दी, लेकिन अध्यक्ष के रूप में वे आज भी कंपनी और 'जया हिंद इंडस्ट्रीज' का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके कार्य करने की अनुशासित जर्मन शैली और सटीक समयबद्धता उनके व्यक्तित्व की एक विशिष्ट पहचान है।

वित्तीय दृष्टिकोण से फिरोदिया परिवार भारत के सबसे संपन्न औद्योगिक घरानों में से एक है। फोर्ब्स के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 27,800 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसका एक बड़ा हिस्सा बजाज ऑटो और बजाज फिनसर्व जैसी कंपनियों में उनकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी से आता है। फोर्स मोटर्स के शेयरों ने पिछले एक साल में निवेशकों को 137% से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है, जो कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति और कुशल प्रबंधन को दर्शाता है। यह फिरोदिया साम्राज्य की एकमात्र सूचीबद्ध कंपनी है, जिसका बाजार पूंजीकरण लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

फिरोदिया परिवार का योगदान केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने देश में यात्रा के तौर-तरीकों को बदला है। भारत में पहली ऑटो रिक्शा निर्माण इकाई स्थापित करने से लेकर मैटाडोर, लूना और काइनेटिक स्कूटर जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड पेश करने तक, इस परिवार ने ऑटो इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। भले ही आज काइनेटिक या लूना का उत्पादन बंद हो गया हो, लेकिन उनके पिता द्वारा शुरू किया गया ऑटो रिक्शा का विचार आज भी करोड़ों भारतीयों की लाइफलाइन बना हुआ है। अभय फिरोदिया के नेतृत्व में फोर्स मोटर्स आज वैन, ट्रैक्टर और एसयूवी के क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम है।


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