पुणे न्यूज डेस्क: पूर्व महाराष्ट्र मंत्री एकनाथ खडसे और उनकी पत्नी मंदाकिनी खडसे शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को मुंबई की विशेष अदालत में पेश हुए। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) रद्द कर दिया। सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने पिछले सप्ताह आरोप तय करने की प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रहने पर वारंट जारी किया था।
केंद्रीय एजेंसी का आरोप है कि 2016 में, जब खडसे भाजपा सरकार में राजस्व मंत्री थे, उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर पुणे जिले के भोसरी इलाके में तीन एकड़ जमीन अपनी पत्नी मंदाकिनी खडसे और दामाद गिरीश चौधरी के नाम खरीदने में मदद की।
पिछले साल दिसंबर में अदालत ने उनका डिस्चार्ज आवेदन खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया यह सामने आता है कि मंदाकिनी खडसे और गिरीश चौधरी ने जमीन ऐसे तरीके से हासिल की, जो कानूनी रूप से उचित नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध तथ्यों से आरोपियों की मंशा स्पष्ट दिखती है और मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है।
2016 में इस मामले के सामने आने के बाद एकनाथ खडसे को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। आरोप है कि खडसे परिवार ने यह जमीन 3.75 करोड़ रुपये में खरीदी, जबकि उसकी वास्तविक कीमत 31.01 करोड़ रुपये बताई गई थी। खडसे दंपति ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को उच्च अदालत में चुनौती दी है।